मंत्र · Shiva

Mahamrityunjaya Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

॥ ॐ ॥

अर्थ

हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खीरा (ककड़ी) अपनी बेल के बंधन से सहज ही अलग हो जाता है, उसी प्रकार वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता (मोक्ष) की प्राप्ति के लिए — मृत्यु से नहीं, बल्कि मृत्यु के भय और अज्ञान के बंधन से।

जप विधि

अनुशंसित संख्या: 108 times (1 mala), or in multiples of 11

मंत्र-जप में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्पष्ट उच्चारण और नियमितता है। शांत स्थान चुनें, आराम से बैठें और अपनी सांस को सहज रहने दें। मंत्र को जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय उसके शब्दों और भाव पर ध्यान दें। यदि आप नए साधक हैं तो कम संख्या से शुरुआत करके धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा सकते हैं। परंपराओं में जप की विधि अलग हो सकती है, इसलिए अपने परिवार या गुरु से मिली मर्यादा का सम्मान करें। मंत्र आध्यात्मिक साधना का सहारा है; स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक समस्या में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी अवश्य लें।

इस मंत्र का पारंपरिक संदर्भ, संस्कृत पाठ और अंग्रेज़ी व्याख्या देखने के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य देवताओं के मंत्रों के लिए हिंदी मंत्र संग्रह पर जाएँ।

Read this page in English →