मंत्र · Savitr (Surya)
Gayatri Mantra
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
Om Bhur Bhuvah Svah Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahi Dhiyo Yo Nah Prachodayat
अर्थ
हम उस सृष्टिकर्ता परमात्मा (सविता देव) के दिव्य तेज का ध्यान करते हैं, जो पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग — तीनों लोकों में व्याप्त है और पूजनीय है। वे हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
जप विधि
अनुशंसित संख्या: 108 times (1 mala), or in multiples of 3
मंत्र-जप में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्पष्ट उच्चारण और नियमितता है। शांत स्थान चुनें, आराम से बैठें और अपनी सांस को सहज रहने दें। मंत्र को जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय उसके शब्दों और भाव पर ध्यान दें। यदि आप नए साधक हैं तो कम संख्या से शुरुआत करके धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा सकते हैं। परंपराओं में जप की विधि अलग हो सकती है, इसलिए अपने परिवार या गुरु से मिली मर्यादा का सम्मान करें। मंत्र आध्यात्मिक साधना का सहारा है; स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक समस्या में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी अवश्य लें।
इस मंत्र का पारंपरिक संदर्भ, संस्कृत पाठ और अंग्रेज़ी व्याख्या देखने के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य देवताओं के मंत्रों के लिए हिंदी मंत्र संग्रह पर जाएँ।