आयुर्वेद · Dosha
Pitta Dosha (पित्त दोष)
परिचय
पित्त त्रिदोषों में दूसरा दोष है, जो अग्नि और जल तत्वों से बना है। यह शरीर की हर परिवर्तन प्रक्रिया को नियंत्रित करता है — भोजन का पाचन, पोषक तत्वों का चयापचय, शरीर के तापमान का नियमन, और मन में विचारों व संवेदनाओं का प्रसंस्करण। संतुलित होने पर पित्त तीव्र पाचन, तीक्ष्ण बुद्धि, अच्छे निर्णय और स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता के रूप में प्रकट होता है। असंतुलित होने पर यह चिड़चिड़ापन, क्रोध, अम्लता, त्वचा पर चकत्ते और अत्यधिक आलोचनात्मक स्वभाव के रूप में दिखाई दे सकता है। पित्त प्रधान व्यक्ति सामान्यतः मध्यम शरीर के, गर्म शरीर वाले और तीव्र भूख वाले होते हैं, जिन्हें गर्मी में असहजता महसूस होती है। गर्मी (मौसम और तीखा-तला भोजन दोनों), अत्यधिक प्रतिस्पर्धा या तीव्रता, और भोजन छोड़ना — इन सबसे पित्त असंतुलित होता है। इसलिए पित्त को संतुलित रखने की सलाहों में शीतलता, संयम और अत्यधिक तीव्रता से बचना शामिल है।
लाभ
इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।
संस्कृत पाठ, विस्तृत उपयोग विधि और अंग्रेज़ी व्याख्या के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य विषयों के लिए हिंदी आयुर्वेद संग्रह पर जाएँ।