आयुर्वेद · Routine
Tongue Scraping (Jihwa Prakshalana) (जिह्वा प्रक्षालन)
परिचय
जिह्वा प्रक्षालन, यानी जीभ खुरचना, आयुर्वेदिक दिनचर्या के सबसे सरल और सबसे व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली प्रथाओं में से एक है — एक पतले, घुमावदार खुरचनी (पारंपरिक रूप से धातु की, अक्सर ताँबे या चाँदी की) से रातभर जीभ पर जमी परत को हटाना। आयुर्वेदिक तर्क इस परत को "आम" से जोड़ता है, जो अग्नि की अवधारणा में वर्णित अधूरे पाचन का उपोत्पाद है, और माना जाता है कि यह रातभर में जीभ पर भी जमा हो जाता है। ताज़ी साँस के अलावा, शास्त्रों में नियमित जीभ खुरचने को स्वाद की स्पष्ट अनुभूति से भी जोड़ा गया है, क्योंकि परत जमी जीभ को छहों रसों को ठीक से पहचानने में कम सक्षम माना जाता है — जो उस पद्धति में महत्वपूर्ण है जहाँ स्वाद का उपयोग भोजन और औषधि के चयन के लिए निदानात्मक रूप से किया जाता है। यह सामान्यतः सुबह की दिनचर्या का सबसे पहला कदम होता है, पानी पीने या दाँत साफ करने से भी पहले।
लाभ
इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।
सूचना: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी भी जड़ी-बूटी या अभ्यास को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, दवा ले रहे हैं, या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं।
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