मंत्र · Ketu

केतु मंत्र (Ketu Mantra) — जाप विधि, अर्थ और लाभ

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

Om Sraam Sreem Sraum Sah Ketave Namah

॥ ॐ ॥

अर्थ

मैं केतु देव को नमन करता हूँ। "स्रां स्रीं स्रौं" बीज अक्षर केतु ग्रह की शक्ति का प्रतीक हैं। यह मंत्र वैराग्य, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और केतु की पीड़ा से राहत पाने के लिए जपा जाता है।

जप विधि

अनुशंसित संख्या: 108 times, traditionally using a cat's eye (lehsunia) or rudraksha mala

मंत्र-जप में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्पष्ट उच्चारण और नियमितता है। शांत स्थान चुनें, आराम से बैठें और अपनी सांस को सहज रहने दें। मंत्र को जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय उसके शब्दों और भाव पर ध्यान दें। यदि आप नए साधक हैं तो कम संख्या से शुरुआत करके धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा सकते हैं। परंपराओं में जप की विधि अलग हो सकती है, इसलिए अपने परिवार या गुरु से मिली मर्यादा का सम्मान करें। मंत्र आध्यात्मिक साधना का सहारा है; स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक समस्या में आवश्यक व्यावहारिक सहायता भी अवश्य लें।

अन्य प्रचलित मंत्र

केतु बीज मंत्र

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

केतु ग्रह का मुख्य बीज मंत्र, जिसे केतु की महादशा, अंतर्दशा या कष्टकारी गोचर के समय जपा जाता है।

केतु का लघु मंत्र

ॐ कें केतवे नमः

सरल और छोटा मंत्र, जिसे दैनिक जप के लिए उपयुक्त माना जाता है।

नवग्रह स्तोत्र से केतु मंत्र

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥

"पलाश के फूल के समान वर्ण वाले, तारों और ग्रहों के मस्तक, रौद्र स्वरूप वाले केतु को मैं प्रणाम करता हूँ।" — नवग्रह स्तोत्र से।

केतु वैदिक मंत्र

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथाः॥

ऋग्वेद (1.6.3) का यह मंत्र नवग्रह पूजा में केतु के लिए पढ़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु मंत्र का जाप किस दिन करना चाहिए?

परंपराओं में केतु मंत्र के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन प्रचलित है। कई लोग गणेश जी की पूजा के साथ केतु मंत्र का जाप करते हैं, क्योंकि गणेश जी को केतु के दोष शांत करने वाला माना जाता है।

केतु मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

दैनिक साधना में 108 बार (एक माला) जाप किया जाता है। नवग्रह शांति की पारंपरिक विधि में केतु के बीज मंत्र का कुल 17,000 जाप बताया गया है।

केतु मंत्र के क्या लाभ हैं?

परंपरा के अनुसार केतु मंत्र आध्यात्मिक उन्नति, वैराग्य, अंतर्ज्ञान और केतु की कष्टकारी दशा में मानसिक स्थिरता के लिए जपा जाता है।

केतु और राहु मंत्र साथ में जप सकते हैं?

हाँ। राहु और केतु को एक ही धुरी के दो छोर माना जाता है, इसलिए कई साधक दोनों के मंत्र साथ में जपते हैं।

इस मंत्र का पारंपरिक संदर्भ, संस्कृत पाठ और अंग्रेज़ी व्याख्या देखने के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य देवताओं के मंत्रों के लिए हिंदी मंत्र संग्रह पर जाएँ।

Read this page in English →