आयुर्वेद · Routine
Abhyanga (Oil Self-Massage) (अभ्यंग)
परिचय
अभ्यंग शरीर पर गर्म तेल से मालिश करने की प्रथा है, जो पारंपरिक रूप से दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है और सामान्यतः सुबह स्नान से पहले की जाती है। शास्त्रों में इसे विशेष रूप से वात-शामक बताया गया है, जो समझ में आता है क्योंकि वात सूखेपन और अत्यधिक उत्तेजना से जुड़ा है — तेल (नमी और स्थिरता देने वाला) और स्पर्श (धीमा, लयबद्ध) दोनों सीधे इसका प्रतिकार करते हैं। पारंपरिक अभ्यंग में अंगों की लंबाई में लंबे स्ट्रोक और जोड़ों व पेट पर गोलाकार स्ट्रोक का प्रयोग होता है, सामान्यतः बाहरी अंगों से शुरू करके भीतर की ओर, साथ ही सिर की त्वचा और पैरों के तलवों पर कुछ अतिरिक्त ध्यान — दोनों को आयुर्वेदिक स्पर्श में विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। तेल का चुनाव पारंपरिक रूप से प्रकृति के अनुसार होता है: वात और कफ के लिए उष्ण तिल का तेल, पित्त के लिए शीतल नारियल तेल, हालाँकि तिल का तेल सबसे शास्त्रीय डिफ़ॉल्ट विकल्प है।
लाभ
इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।
सूचना: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी भी जड़ी-बूटी या अभ्यास को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, दवा ले रहे हैं, या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं।
संस्कृत पाठ, विस्तृत उपयोग विधि और अंग्रेज़ी व्याख्या के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य विषयों के लिए हिंदी आयुर्वेद संग्रह पर जाएँ।