आयुर्वेद · Herb

Cinnamon (त्वक्)

परिचय

दालचीनी (सिनामोमम वेरम/कैसिया), जिसे संस्कृत में त्वक् (शाब्दिक अर्थ "छाल") कहा जाता है, एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार वृक्ष की सूखी भीतरी छाल है, जो आयुर्वेद में रसोई मसाले और लक्षित औषधि दोनों रूपों में प्रयोग होती है। इसका संस्कृत नाम दर्शाता है कि इसमें विशेष रूप से छाल का उपयोग होता है, जबकि अधिकांश आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में जड़, पत्ती या फल प्रयोग होते हैं। दालचीनी को तीखे और मीठे रस तथा अत्यंत उष्ण गुण वाली औषधि माना गया है, जो पारंपरिक रूप से रक्त संचार को उद्दीप्त करने, पाचन को सहायता देने और शरीर में ठंडक व नमी की स्थितियों को संतुलित करने के लिए प्रयोग की जाती है — जिससे यह विशेष रूप से वात और कफ असंतुलन के लिए उपयुक्त है। यह गर्म हर्बल चाय और सुस्त पाचन या ठंड-जनित जोड़ों की असुविधा के लिए बनाए गए शास्त्रीय सूत्रों में एक सामान्य घटक है।

लाभ

इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।

सूचना: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी भी जड़ी-बूटी या अभ्यास को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, दवा ले रहे हैं, या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं।

संस्कृत पाठ, विस्तृत उपयोग विधि और अंग्रेज़ी व्याख्या के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य विषयों के लिए हिंदी आयुर्वेद संग्रह पर जाएँ।

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