आयुर्वेद · Herb

Ginger (शुण्ठी / आर्द्रक)

परिचय

अदरक (ज़िंजिबर ऑफिसिनेल) आयुर्वेद में एक विशेष स्थान रखता है: इसके ताज़े रूप (आर्द्रक) और सूखे रूप (शुण्ठी) के लिए अलग-अलग संस्कृत नाम हैं, और शास्त्रों में इन्हें थोड़े अलग गुणों वाला माना गया है — ताज़ा अदरक अधिक सौम्य माना जाता है, जबकि सूखा अदरक अधिक उष्ण और पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने में अधिक प्रभावी माना जाता है। सूखे अदरक को कभी-कभी विश्वभेषज भी कहा जाता है, यानी "सार्वभौमिक औषधि," जो आयुर्वेदिक सूत्रों में इसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। अदरक को तीखे रस और उष्ण गुण वाली औषधि माना गया है, और यह सुस्त अग्नि को उद्दीप्त करने वाली प्रमुख औषधियों में से एक है — इसलिए इसे भोजन से पहले पाचन-सहायक के रूप में और मतली, ज़ुकाम-जनित जकड़न व सामान्य पाचन असुविधा के उपचार में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। इसे विशेष रूप से वात और कफ के लिए अच्छा माना जाता है, जबकि तीव्र पित्त या सक्रिय सूजन वाले व्यक्तियों को इसके उष्ण स्वभाव के कारण सावधानी से उपयोग करना चाहिए।

लाभ

इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।

सूचना: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी भी जड़ी-बूटी या अभ्यास को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, दवा ले रहे हैं, या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं।

संस्कृत पाठ, विस्तृत उपयोग विधि और अंग्रेज़ी व्याख्या के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य विषयों के लिए हिंदी आयुर्वेद संग्रह पर जाएँ।

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