आयुर्वेद · Herb

Turmeric (हरिद्रा)

परिचय

हल्दी (कुरकुमा लोंगा), जिसे संस्कृत में हरिद्रा कहा जाता है, एक कंद है जो भारत की रसोई और आयुर्वेदिक परंपरा दोनों में केंद्रीय स्थान रखता है। यह चिकित्सा से परे भी दैनिक जीवन में गहराई से जुड़ी है — विवाह में हल्दी का उबटन शुभता और त्वचा की चमक के लिए लगाया जाता है, और हल्दी वाला दूध पीढ़ियों से चली आ रही एक घरेलू विधि है जो सामान्य सर्दी, खाँसी और स्वास्थ्य-लाभ में सहायक मानी जाती है। आयुर्वेदिक वर्गीकरण में हल्दी को तीखे और कड़वे रस वाली, उष्ण गुण वाली औषधि माना गया है, जो परंपरागत रूप से त्वचा, रक्त और घाव-संबंधी सहायता देने वाली औषधियों में रखी गई है। जोड़ों के आराम और सूजन-संबंधी शिकायतों में इसका उपयोग आधुनिक शोध में सबसे अधिक अध्ययन किए गए आयुर्वेदिक पहलुओं में से एक है, जिसका मुख्य कारण इसका सक्रिय तत्व कुरकुमिन है।

लाभ

इसके पारंपरिक लाभों का विस्तृत विवरण अंग्रेज़ी पृष्ठ पर उपलब्ध है।

सूचना: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी भी जड़ी-बूटी या अभ्यास को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें, विशेष रूप से यदि आप गर्भवती हैं, दवा ले रहे हैं, या किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त हैं।

संस्कृत पाठ, विस्तृत उपयोग विधि और अंग्रेज़ी व्याख्या के लिए अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ें। अन्य विषयों के लिए हिंदी आयुर्वेद संग्रह पर जाएँ।

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