त्योहार · बुधवार, 11 नवंबर 2026
भाई दूज 2026 कब है? तिलक का शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि
अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया है और दिवाली के पाँच दिन के पर्व का अंतिम दिन है। भाई को तिलक करने का शुभ समय अपराह्न यानी दोपहर में, उत्तर भारत के शहरों में लगभग 1:00 से 3:30 बजे तक माना जाता है।
भाई दूज 2026: तिथि और मुहूर्त
| भाई दूज (यम द्वितीया) | बुधवार, 11 नवंबर 2026 |
|---|---|
| तिथि | कार्तिक शुक्ल द्वितीया |
| तिलक का समय | अपराह्न (दोपहर), उत्तर भारत के शहरों में लगभग 1:00 से 3:30 बजे तक |
| पिछला दिन | गोवर्धन पूजा, 10 नवंबर (कुछ शहरों में 9 नवंबर) |
| विदेश में | भारत से बाहर गणना किए गए कुछ कैलेंडर 10 नवंबर बताते हैं — स्थानीय पंचांग देखें |
समय नई दिल्ली के अनुसार अनुमानित हैं। सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भाई दूज दिवाली के पाँच दिन के उत्सव का समापन है। इसे भैया दूज, भाऊ बीज (महाराष्ट्र), भाई फोंटा (बंगाल), भाई टीका (नेपाल), भ्रातृ द्वितीया और यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहन भाई को घर बुलाकर तिलक करती है, आरती उतारती है और प्रेम से भोजन कराती है; भाई उपहार देकर उसकी रक्षा और सहयोग का वचन देता है।
भाई दूज की कथा
यमराज और यमुना
यमराज और यमुना सूर्य देव की संतान हैं। यमुना अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं, पर मृत्यु के देवता होने के कारण यमराज अपने कार्य में व्यस्त रहते और आना टालते रहे। अंततः कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे बहन के द्वार पहुँचे। यमुना ने प्रसन्न होकर आरती उतारी, माथे पर तिलक लगाया और अपने हाथ से बना भोजन कराया।
बहन के प्रेम से भावविभोर यमराज ने वर माँगने को कहा। यमुना ने माँगा कि वे हर वर्ष इसी दिन उनके घर आएँ, और जो भाई इस दिन बहन से इसी तरह तिलक करवाए, उसे अकाल मृत्यु का भय न रहे। यमराज ने “तथास्तु” कहा। इसीलिए यह दिन यम द्वितीया कहलाता है, और कई जगह इस दिन भाई-बहन साथ में यमुना स्नान करते हैं।
श्रीकृष्ण और सुभद्रा
एक अन्य परंपरा के अनुसार नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास लौटे। सुभद्रा ने दीपक, फूल और मिठाई से उनका स्वागत किया और माथे पर तिलक लगाया। यही प्रेमपूर्ण स्वागत भाई दूज की रीति में याद किया जाता है।
भाई दूज पूजा और तिलक विधि
- थाली सजाएँ: थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई, फूल, नारियल का गोला (गोला) और कलावा रखें।
- आसन: भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके चौकी या आसन पर बिठाएँ। कई घरों में चावल के आटे से चौक पूरकर उस पर बिठाया जाता है।
- गणेश स्मरण: तिलक से पहले गणेश जी का स्मरण करें।
- तिलक: अपराह्न के शुभ समय में भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएँ, हाथ में कलावा बाँधें।
- आरती और मिठाई: दीपक से आरती उतारें, मिठाई खिलाएँ और भाई की लंबी आयु व सुख की प्रार्थना करें।
- भोजन: भाई को प्रेम से बनाया भोजन कराएँ — यही यमुना की कथा का केंद्र है।
- उपहार और आशीर्वाद: भाई बहन को उपहार देता है और हर परिस्थिति में साथ देने का वचन देता है।
तिलक की थाली की सामग्री
रोली या कुमकुम, अक्षत, घी का दीपक, कलावा, मिठाई, फूल, सूखा नारियल (गोला), पान-सुपारी (यदि परंपरा हो), और जल का लोटा।
भाई दूज के नियम: क्या करें, क्या न करें
क्या करें
- संभव हो तो भाई बहन के घर जाकर भोजन करे — यही इस पर्व की मूल भावना है।
- दूर रहने वाले भाई-बहन फ़ोन या वीडियो कॉल पर ही सही, एक-दूसरे से बात करें और आशीर्वाद दें।
- ऐसा वचन दें जिसे रोज़मर्रा के जीवन में निभाया जा सके।
क्या न करें
- उपहार की कीमत को स्नेह का पैमाना न बनाएँ।
- आपसी मनमुटाव हो तो इस दिन उसे बढ़ाएँ नहीं — छोटा-सा संदेश भी रिश्ता सुधारने की शुरुआत बन सकता है।
- दीपक को बिना देखरेख न छोड़ें।
भाई दूज से एक दिन पहले गोवर्धन पूजा है, और 13 से 16 नवंबर तक छठ पूजा का महापर्व मनाया जाएगा। पूरे पाँच दिन की तिथियाँ दिवाली 2026 पृष्ठ पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज 2026 में कब है?
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है, दिवाली की लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर) के तीन दिन बाद। तिलक प्रायः दोपहर में, उत्तर भारत के शहरों में लगभग 1:00 से 3:30 बजे के बीच किया जाता है। अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
भाई दूज की कथा क्या है?
सबसे प्रसिद्ध कथा यमुना और उनके भाई यमराज की है। यमुना ने इस दिन भाई का तिलक, आरती और भोजन से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया कि इस दिन जो भाई बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है और इसकी मुख्य कथा यमराज के अपनी बहन यमुना के घर जाने की है।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
दोनों भाई-बहन के स्नेह के पर्व हैं, पर समय और विधि अलग है। रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा को बहन द्वारा राखी बाँधने का पर्व है, जबकि भाई दूज दिवाली के बाद बहन द्वारा भाई को तिलक, आरती और भोजन कराने का।
भाई दूर हो तो भाई दूज कैसे मनाएँ?
वीडियो कॉल पर आरती और आशीर्वाद, डाक से उपहार, या आसपास के किसी दिन साथ भोजन — परिवार कई तरह से इसे निभाते हैं। चचेरे भाई-बहन या मुँहबोले भाई-बहन के साथ भी यह पर्व मनाया जा सकता है।
भाई दूज दिवाली का कौन-सा दिन है?
पाँचवाँ और अंतिम दिन — धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा और गोवर्धन पूजा के बाद।