त्योहार · रविवार, 8 नवंबर 2026
दिवाली 2026 कब है? तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री
अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। लक्ष्मी पूजा उसी शाम प्रदोष काल में होगी, जो नई दिल्ली में लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक रहेगा, क्योंकि कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर की शाम को व्याप्त है। पाँच दिन का दीपोत्सव 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होकर 11 नवंबर को भाई दूज पर पूरा होगा।
दिवाली 2026: तिथि और मुहूर्त
| दिवाली / लक्ष्मी पूजा | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
|---|---|
| तिथि | कार्तिक अमावस्या — 8 नवंबर की शाम को व्याप्त, 9 नवंबर को दोपहर के आसपास समाप्त |
| पूजा का समय | शाम, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में (कई परिवार इसके भीतर स्थिर लग्न चुनते हैं) |
| प्रदोष काल (नई दिल्ली, अनुमानित) | शाम लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक |
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर |
| नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली | शनिवार, 7 नवंबर (कुछ क्षेत्रों में स्नान 8 नवंबर की सुबह) |
| गोवर्धन पूजा | मंगलवार, 10 नवंबर (मुंबई आदि में 9 नवंबर) |
| भाई दूज | बुधवार, 11 नवंबर |
समय नई दिल्ली के अनुसार अनुमानित हैं। सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
दिवाली या दीपावली कार्तिक अमावस्या की अँधेरी रात को दीपों से जगमगाने का पर्व है। उत्तर भारत में यह भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास और रावण-विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी है; अन्य परंपराओं में यह माँ लक्ष्मी के प्राकट्य, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और राजा बलि की कथा से भी जुड़ी है। हर घर में इस शाम माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है।
दिवाली 2026: पाँचों दिन की तिथियाँ
| तारीख | दिन | मुख्य परंपरा |
|---|---|---|
| शुक्रवार, 6 नवंबर | धनतेरस | सफ़ाई, पहले दीपक, धन्वंतरि और लक्ष्मी पूजा, यम दीपदान |
| शनिवार, 7 नवंबर | नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली / रूप चौदस | कुछ क्षेत्रों में मुख्य स्नान 8 नवंबर की सुबह |
| रविवार, 8 नवंबर | दिवाली / लक्ष्मी पूजा | दीपक, लक्ष्मी-गणेश पूजा, परिवार का मिलन |
| सोमवार, 9 नवंबर | कई पंचांगों में खाली दिन | दोपहर के आसपास अमावस्या समाप्त; मुंबई आदि में इसी शाम गोवर्धन पूजा |
| मंगलवार, 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | कृष्ण पूजा और अन्नकूट; पश्चिम भारत में बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष |
| बुधवार, 11 नवंबर | भाई दूज | बहन द्वारा भाई को तिलक और भोजन |
अमावस्या 9 नवंबर को दोपहर में समाप्त होती है और प्रतिपदा 10 नवंबर तक रहती है, इसलिए 2026 में “पाँच दिन की दिवाली” छह कैलेंडर दिनों में फैली है।
दिवाली की कथा
रामायण के अनुसार रावण का वध करने के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण कार्तिक अमावस्या को अयोध्या लौटे। अपने राजा के स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को घी के दीपों से सजा दिया, और अमावस्या की काली रात उजाले से भर गई। तभी से यह रात दीपों का उत्सव बन गई।
एक दूसरी कथा के अनुसार समुद्र मंथन से इसी दिन माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु का वरण किया। इसलिए दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी स्वच्छ, प्रकाशित और प्रेम से भरे घरों में वास करती हैं।
लक्ष्मी पूजा विधि (घर पर)
- सफ़ाई और सजावट: घर, विशेषकर मुख्य द्वार और पूजा स्थान साफ़ करें, और द्वार पर रंगोली व तोरण लगाएँ।
- चौकी सजाएँ: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र रखें, सामने कलश, दीपक और भोग रखें।
- संकल्प: शांत बैठकर पूजा का संकल्प लें — परिवार को जो मिला है उसके लिए कृतज्ञता और सबके कल्याण की प्रार्थना।
- गणेश पूजन: पहले गणेश जी को फूल, अक्षत और दूर्वा अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।
- लक्ष्मी पूजन: माँ लक्ष्मी का आवाहन कर जल, कुमकुम, कमल या गेंदे के फूल, अक्षत, मिठाई और फल अर्पित करें। “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का 11, 21 या 108 बार जप करें।
- बही-खाता और औज़ार: कई परिवार बही-खाते, कलम, सिक्के या आजीविका के औज़ार चौकी के सामने रखते हैं; व्यापारी इसी शाम चोपड़ा पूजन करते हैं। कुछ घरों में कुबेर की भी पूजा होती है।
- आरती: दीपक से “ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती गाएँ, फिर परंपरा हो तो “जय गणेश देवा”।
- दीप प्रज्वलन: पूजा के दीपक से ही घर के द्वार, खिड़कियों और हर कमरे में दीपक जलाएँ।
- प्रसाद: खील-बताशे और मिठाई परिवार व पड़ोसियों में बाँटें, और कोई एक दान या सेवा का काम करें।
लक्ष्मी आरती के शब्द और अर्थ के लिए लक्ष्मी आरती हिंदी में पढ़ें। पूरी विधि अंग्रेज़ी में Diwali Lakshmi Puja guide में भी है।
लक्ष्मी पूजा सामग्री सूची
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र, लाल कपड़ा और चौकी
- जल से भरा कलश, आम या पान के पत्ते
- घी और तेल के दीपक, द्वार और खिड़कियों के लिए अतिरिक्त दीये
- कमल या गेंदे के फूल, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, दूर्वा
- फल, मिठाई, खील और बताशे
- सिक्के, बही-खाते या कलम (यदि परंपरा हो)
- धूप, कपूर और आरती की थाली
दिवाली पर क्या करें, क्या न करें
क्या करें
- अपने शहर का प्रदोष काल पहले से देखें और सूर्यास्त से पहले चौकी तैयार रखें।
- पूजा के बाद कुछ दान करें — लक्ष्मी उदारता और ईमानदारी की देवी भी हैं।
- बुज़ुर्गों, बच्चों और पालतू जानवरों का ध्यान रखें।
क्या न करें
- दीपक और मोमबत्ती को परदों या ज्वलनशील चीज़ों के पास न रखें और बिना देखरेख न छोड़ें।
- पटाखों से बच्चों, बुज़ुर्गों, जानवरों और पर्यावरण को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखें।
- दूसरे शहर के लिए बना मुहूर्त अपने शहर में न अपनाएँ।
दिवाली से पहले 6 नवंबर को धनतेरस और बाद में 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा व 11 नवंबर को भाई दूज है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली 2026 में कब है?
दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर की शाम को व्याप्त है, इसलिए लक्ष्मी पूजा उसी शाम की जाएगी।
दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल में होती है, जो नई दिल्ली में लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक है। कई परिवार इसके भीतर स्थिर लग्न का समय चुनते हैं। सटीक समय सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
दिवाली 2026 के पाँच दिन कौन-से हैं?
धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 7 नवंबर, दिवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा मंगलवार 10 नवंबर (मुंबई आदि में 9 नवंबर) और भाई दूज बुधवार 11 नवंबर।
इस बार दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर क्यों है?
अमावस्या 9 नवंबर को दोपहर के आसपास समाप्त होती है और प्रतिपदा 10 नवंबर को दोपहर लगभग 2 बजे तक रहती है। उदया प्रतिपदा मानने वाले पंचांग, जैसे नई दिल्ली, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को बताते हैं, इसलिए 9 नवंबर बीच का खाली दिन है।
दिवाली पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
गणेश जी विघ्नहर्ता और हर शुभ आरंभ के देवता हैं, इसलिए हर पूजा में उनकी पूजा पहले होती है। दिवाली पर लक्ष्मी के साथ उनकी पूजा इसलिए होती है कि समृद्धि के साथ विवेक और सद्बुद्धि भी आए।
क्या पुरोहित के बिना घर पर लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?
हाँ। स्वच्छ चौकी, दीपक, गणेश वंदना, लक्ष्मी मंत्र, आरती और प्रसाद के साथ की गई छोटी-सी पूजा भी पूर्ण और सार्थक है। जिन परिवारों में पुरोहित या कुल की विधि है, वे उसी का पालन करें।