त्योहार · शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
धनतेरस 2026 कब है? तिथि, शुभ मुहूर्त, यम दीपदान और पूजा विधि
अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। इसी दिन से दिवाली का पाँच दिन का पर्व शुरू होता है। पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है, जो नई दिल्ली में लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक रहेगा। इसी शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यम दीपदान किया जाता है।
धनतेरस 2026: तिथि और मुहूर्त
| धनतेरस (धनत्रयोदशी) | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
|---|---|
| तिथि | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, 6 नवंबर की शाम को व्याप्त |
| पूजा का समय | शाम, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में |
| प्रदोष काल (नई दिल्ली, अनुमानित) | शाम लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक |
| यम दीपदान | 6 नवंबर की शाम, घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक |
| दिवाली (लक्ष्मी पूजा) | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
समय नई दिल्ली के अनुसार अनुमानित हैं। सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं, क्योंकि यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को आता है। यहीं से दिवाली का पाँच दिन का उत्सव शुरू होता है। घरों की सफ़ाई पूरी होती है, पहले दीपक जलते हैं और परिवार आरोग्य व समृद्धि की प्रार्थना करता है।
धनतेरस की कथा
भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के प्रवर्तक माने जाते हैं। इसीलिए धनतेरस को “धन्वंतरि जयंती” भी कहा जाता है। परंपरा कहती है कि सबसे बड़ा धन आरोग्य है।
राजा हिम के पुत्र की कथा
राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन साँप के डसने से उसकी मृत्यु होगी। उसकी बुद्धिमान पत्नी ने उस रात पति को सोने नहीं दिया। उसने कमरे के द्वार पर अपने सारे सोने-चाँदी के गहने और सिक्कों का ढेर लगा दिया, चारों ओर दीपक जलाए और रात भर कहानियाँ व भजन सुनाती रही। जब यमराज साँप के रूप में आए, तो दीपकों और आभूषणों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं। वे ढेर पर बैठकर गीत सुनते रहे और सुबह होने पर चुपचाप लौट गए। तभी से इस शाम यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है।
धनतेरस पूजा विधि
- तैयारी: दिन में घर, विशेषकर मुख्य द्वार और पूजा स्थान साफ़ करें। द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- चौकी: शाम को चौकी पर साफ़ कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी, गणेश और कुबेर का चित्र रखें।
- गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी को फूल और अक्षत अर्पित करें।
- धन्वंतरि पूजन: प्रदोष काल में धन्वंतरि जी का ध्यान कर परिवार के आरोग्य की प्रार्थना करें और धन्वंतरि मंत्र का जप करें।
- लक्ष्मी-कुबेर पूजन: रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और नए खरीदे बर्तन या सिक्के अर्पित करें; लक्ष्मी मंत्र और “ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती करें।
- यम दीपदान: आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक तेल से भरकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें और परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें।
- दीप प्रज्वलन: घर के द्वार और खिड़कियों पर दीपक जलाएँ और प्रसाद बाँटें।
पूजा सामग्री
लक्ष्मी-गणेश, धन्वंतरि और कुबेर का चित्र, जल का कलश, घी और तेल के दीपक, यम दीपदान के लिए चौमुखा दीपक, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, धूप, मिठाई, फल, खील-बताशे, और यदि परंपरा हो तो नए बर्तन या सिक्के।
धनतेरस पर क्या करें, क्या न करें
क्या करें
- अपने शहर के प्रदोष काल की पुष्टि करें और उसी में पूजा करें।
- कोई उपयोगी वस्तु खरीदनी हो तो अपनी सामर्थ्य के भीतर खरीदें — बर्तन, दीपक या झाड़ू पारंपरिक विकल्प हैं।
- इस दिन किसी ज़रूरतमंद को भोजन या दवा देकर धन्वंतरि के आरोग्य-संदेश को सार्थक करें।
क्या न करें
- खरीदारी को पुण्य की शर्त न बनाएँ; उधार लेकर दिखावा न करें।
- दीपक अस्थिर या ज्वलनशील जगह पर न रखें और उसे बिना देखरेख न छोड़ें।
- परंपरा के अनुसार इस शाम घर में कलह और अस्वच्छता से बचें।
धनतेरस के बाद 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) और 8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा है। इससे पहले 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 2026 में कब है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की शाम को रहेगी, इसलिए पूजा उसी शाम प्रदोष काल में होगी।
धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है। नई दिल्ली में यह शाम लगभग 5:30 से 8:00 बजे तक रहेगा। अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
क्या धनतेरस और दिवाली एक ही दिन है?
नहीं। धनतेरस दिवाली के पाँच दिन के पर्व का पहला दिन है। 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को और दिवाली व लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
परंपरा से लोग धातु के बर्तन, दीपक, झाड़ू या घर के लिए कोई उपयोगी वस्तु खरीदते हैं; कुछ लोग कुछ नहीं खरीदते। खरीदारी धार्मिक अनिवार्यता नहीं है — अपनी सामर्थ्य के भीतर और सोच-समझकर ही खरीदें।
धनतेरस पर यम दीपदान क्यों किया जाता है?
राजा हिम के पुत्र की कथा के अनुसार इस शाम यमराज के नाम से घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। यह दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें।
धनतेरस पर किस देवता की पूजा होती है?
परंपरा के अनुसार धनतेरस पर आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है। कुछ परिवार धन्वंतरि पर अधिक ध्यान देते हैं, कुछ लक्ष्मी-कुबेर पर, और कई यम दीपदान भी करते हैं।