त्योहार · रविवार, 1 नवंबर 2026

अहोई अष्टमी 2026 कब है? तिथि, पूजा मुहूर्त, तारों का समय और व्रत कथा

अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026

अहोई अष्टमी 2026 रविवार, 1 नवंबर को है। नई दिल्ली में पूजा का मुहूर्त शाम लगभग 5:36 से 6:54 बजे तक है और तारे लगभग 6:00 बजे से दिखने लगेंगे। माताएँ संतान की लंबी आयु के लिए दिन भर व्रत रखकर शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

अहोई अष्टमी 2026: तिथि और मुहूर्त

अहोई अष्टमीरविवार, 1 नवंबर 2026
अष्टमी तिथि1 नवंबर दोपहर लगभग 2:51 बजे से 2 नवंबर दोपहर 1:10 बजे तक
पूजा मुहूर्तशाम लगभग 5:36 से 6:54 बजे तक
तारे दिखने का समयशाम लगभग 6:00 बजे से
चंद्रोदयरात लगभग 11:40 बजे

समय नई दिल्ली के अनुसार अनुमानित हैं। सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि शहर के अनुसार बदलती है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है और मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में प्रचलित है। यह करवा चौथ के तीन दिन बाद और दिवाली से एक सप्ताह पहले आती है। अमांत पंचांग (गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत) में इसी दिन को आश्विन कृष्ण अष्टमी कहा जाता है।

अहोई माता कौन हैं?

अहोई माता, जिन्हें अहोई भगवती भी कहा जाता है, देवी का रक्षक रूप हैं और प्रायः माता पार्वती से जोड़ी जाती हैं। परंपरा से उनका चित्र दीवार या कागज़ पर गेरू से बनाया जाता है — आठ कोनों (अष्ट कोष्ठ) वाली देवी, और उनके पास सेह (साही) और उसके बच्चे। आजकल छपे हुए अहोई माता के कैलेंडर भी खूब प्रचलित हैं।

अहोई अष्टमी व्रत कथा

एक साहूकारनी के सात बेटे थे। दिवाली से पहले घर लीपने के लिए वह जंगल में मिट्टी खोदने गई। खुदाई करते हुए उसकी कुदाल अनजाने में एक सेह की माँद में जा लगी और सेह का एक बच्चा मर गया। दुखी और डरी हुई वह घर लौट आई। उसी वर्ष के भीतर एक-एक करके उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।

शोक में डूबी साहूकारनी ने गाँव की बुज़ुर्ग महिलाओं को अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने सलाह दी कि वह कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई भगवती की पूजा करे, देवी के पास सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाए, दिन भर व्रत रखे और अपनी भूल की क्षमा माँगे। उसने वर्षों तक पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया। उसके पश्चाताप से प्रसन्न होकर अहोई माता ने उसके सातों बेटे लौटा दिए।

यह कथा ज़िम्मेदारी, पश्चाताप और माँ के रक्षक प्रेम — मानवीय और दैवी, दोनों — का संदेश देती है। शाम की पूजा में परिवार साथ बैठकर यही कथा सुनता है।

अहोई अष्टमी पूजा विधि

  1. सुबह: स्नान करके संतान के लिए व्रत का संकल्प लें और दिन शांति से बिताएँ। कई माताएँ निर्जला व्रत रखती हैं, पर हल्का व्रत भी पूरी तरह मान्य है।
  2. चित्र: शाम से पहले उत्तर या पूर्व दिशा की साफ़ दीवार पर सेह और उसके बच्चों सहित अहोई माता का चित्र बनाएँ या लगाएँ।
  3. कलश: एक कलश या करवा (अक्सर करवा चौथ वाला ही) जल से भरकर चित्र के पास रखें। कुछ परिवार चाँदी की अहोई और मोतियों की “स्याहु माला” धागे में पिरोकर पूजते हैं और हर साल एक मोती जोड़ते हैं।
  4. शाम की पूजा: मुहूर्त में रोली, चावल, फूल, घी का दीपक और भोग — पूरी, हलवा, मीठी मठरी या पुए — अर्पित करें।
  5. कथा: बच्चों को पास बिठाकर अहोई अष्टमी की कथा पढ़ें या सुनें।
  6. तारों को अर्घ्य: तारे निकलने पर कलश के जल से उन्हें अर्घ्य दें, संतान की मंगलकामना करें और प्रसाद से व्रत खोलें।
  7. पूजा के बाद: कलश का जल सँभालकर रखें; कई घरों में इसे दिवाली पर उपयोग किया जाता है।

पूजा सामग्री

अहोई माता का चित्र या कैलेंडर, गेरू, जल से भरा कलश या करवा, रोली, अक्षत, फूल, घी का दीपक, धूप, कलावा, चाँदी की अहोई या स्याहु माला (यदि परंपरा हो), और भोग के लिए पूरी, हलवा, मठरी या पुए।

राधा कुंड स्नान

ब्रज में अहोई अष्टमी की रात मथुरा के पास गोवर्धन स्थित राधा कुंड में स्नान की परंपरा है। संतान की कामना रखने वाले दंपती आधी रात के आसपास कुंड में स्नान करते हैं और भारी भीड़ जुटती है। वहाँ जाने का विचार हो तो स्थानीय व्यवस्था और भीड़ संबंधी सूचनाएँ पहले देख लें।

व्रत के नियम: क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • पूजा से पहले अपने शहर में तारे निकलने और पूजा के समय की पुष्टि करें।
  • कथा में बच्चों को शामिल करें, ताकि वे परंपरा का अर्थ समझें।
  • व्रत खोलने के बाद हल्का, सात्विक भोजन करें।

क्या न करें

  • इस दिन मिट्टी खोदने या पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचाने से परंपरागत रूप से बचा जाता है।
  • स्वास्थ्य ठीक न हो तो ज़बरदस्ती निर्जला व्रत न रखें — गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और बीमार माताएँ पानी, फल या दूध ले सकती हैं।
  • दीपक को बिना देखरेख के न छोड़ें।

अहोई अष्टमी के बाद 6 नवंबर को धनतेरस से दिवाली का पाँच दिन का उत्सव शुरू होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई अष्टमी 2026 में कब है?

अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम लगभग 5:36 से 6:54 बजे तक है, तारे लगभग 6:00 बजे से दिखेंगे और चंद्रोदय रात लगभग 11:40 बजे होगा। अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

अहोई अष्टमी का व्रत क्यों रखा जाता है?

माताएँ अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख के लिए अहोई माता (देवी पार्वती का एक रूप) का व्रत रखती हैं। संतान की कामना रखने वाले दंपती भी यह व्रत करते हैं।

अहोई अष्टमी का व्रत कब खोला जाता है?

अधिकतर परिवारों में शाम को तारे देखकर और उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ परिवार चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं, जो इस दिन देर रात निकलता है — अपने घर की परंपरा का पालन करें।

करवा चौथ के कितने दिन बाद अहोई अष्टमी आती है?

आमतौर पर करवा चौथ के चार तिथि बाद और दिवाली से लगभग आठ दिन पहले। 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर को, अहोई अष्टमी 1 नवंबर को और दिवाली 8 नवंबर को है।

अहोई माता के चित्र में सेह (साही) क्यों बनाई जाती है?

व्रत कथा में एक माँ से अनजाने में सेह के बच्चे की मृत्यु हो जाती है। प्रायश्चित के रूप में अहोई माता के साथ सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाकर पूजा की जाती है। यह दूसरे जीवों के प्रति करुणा और ज़िम्मेदारी का प्रतीक है।

क्या अहोई अष्टमी का व्रत बिना निर्जला रहे रख सकते हैं?

हाँ। गर्भवती महिलाएँ, दवा लेने वाली और किसी बीमारी से ग्रस्त माताएँ पानी, फल या दूध लेकर हल्का व्रत रख सकती हैं। पूजा, कथा और संतान के प्रति प्रेम ही इस व्रत का मूल है।

सभी हिंदू त्योहार 2026 की सूची देखें →

Read this page in English →