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12 ज्योतिर्लिंग के नाम और स्थान: पूरी सूची, कथा और स्तोत्र
अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं — सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), वैद्यनाथ (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)। ये वे स्थान हैं जहाँ शिव स्वयं ज्योति (प्रकाश) के रूप में प्रकट हुए माने जाते हैं।
12 ज्योतिर्लिंग: एक नज़र में
| कुल ज्योतिर्लिंग | 12 |
|---|---|
| सबसे अधिक | महाराष्ट्र (3) — भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर |
| पहला ज्योतिर्लिंग | सोमनाथ, गुजरात |
| एकमात्र दक्षिणमुखी | महाकालेश्वर, उज्जैन |
| शास्त्रीय आधार | शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता), द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र |
| प्रमुख पर्व | महाशिवरात्रि, सावन (श्रावण) मास, प्रदोष |
दर्शन का समय, यात्रा के नियम और व्यवस्थाएँ समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए यात्रा से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।
“सौराष्ट्रे सोमनाथं च…” — बहुत से घरों में शिव-पूजा इसी स्तोत्र से शुरू होती है, जिसमें भारत के कोने-कोने में बसे बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम एक साथ आते हैं। गुजरात के समुद्र तट से हिमालय की बर्फ़ तक और रामेश्वरम के सागर से झारखंड के देवघर तक — ये बारह धाम मिलकर पूरे भारत को शिव-भक्ति के एक सूत्र में बाँधते हैं।
ज्योतिर्लिंग का अर्थ और कथा
ज्योतिर्लिंग का अर्थ है — प्रकाश के रूप में शिव का चिह्न। शिव पुराण की कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हुआ कि दोनों में बड़ा कौन है। तभी उनके बीच एक अनंत ज्योति-स्तंभ (प्रकाश का खंभा) प्रकट हुआ। तय हुआ कि जो इसका छोर पहले खोज लेगा, वही बड़ा। विष्णु वराह बनकर नीचे गए और ब्रह्मा हंस बनकर ऊपर। दोनों को अंत नहीं मिला। विष्णु ने सच स्वीकार किया, पर ब्रह्मा ने झूठ कहा कि उन्होंने ऊपरी छोर देख लिया (केतकी के फूल को झूठा गवाह बनाकर)। तब उस स्तंभ से शिव प्रकट हुए और ब्रह्मा के झूठ का दंड दिया।
यही अनंत ज्योति शिव का वास्तविक स्वरूप है, और मान्यता है कि जिन बारह स्थानों पर शिव इसी ज्योति रूप में प्रकट हुए, वे ज्योतिर्लिंग कहलाए।
12 ज्योतिर्लिंग की पूरी सूची
| क्रम | ज्योतिर्लिंग | स्थान | राज्य |
|---|---|---|---|
| 1 | सोमनाथ | प्रभास पाटन, वेरावल के पास | गुजरात |
| 2 | मल्लिकार्जुन | श्रीशैलम | आंध्र प्रदेश |
| 3 | महाकालेश्वर | उज्जैन | मध्य प्रदेश |
| 4 | ओंकारेश्वर | नर्मदा नदी का द्वीप, खंडवा ज़िला | मध्य प्रदेश |
| 5 | केदारनाथ | रुद्रप्रयाग ज़िला, हिमालय | उत्तराखंड |
| 6 | भीमाशंकर | सह्याद्रि पर्वत, पुणे ज़िला | महाराष्ट्र |
| 7 | काशी विश्वनाथ | वाराणसी | उत्तर प्रदेश |
| 8 | त्र्यंबकेश्वर | गोदावरी के उद्गम के पास, नासिक | महाराष्ट्र |
| 9 | वैद्यनाथ | देवघर | झारखंड |
| 10 | नागेश्वर | द्वारका के पास | गुजरात |
| 11 | रामेश्वरम (रामनाथस्वामी) | रामेश्वरम द्वीप | तमिलनाडु |
| 12 | घृष्णेश्वर | एलोरा के पास, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) | महाराष्ट्र |
हर ज्योतिर्लिंग की संक्षिप्त कथा
- सोमनाथ: दक्ष प्रजापति के श्राप से क्षय रोग से पीड़ित चंद्रमा (सोम) ने यहाँ शिव की तपस्या की और मुक्ति पाई। इतिहास में यह मंदिर कई बार तोड़ा गया और हर बार फिर बना; वर्तमान मंदिर स्वतंत्रता के बाद 1951 में प्रतिष्ठित हुआ।
- मल्लिकार्जुन: कार्तिकेय के रूठकर क्रौंच पर्वत चले जाने पर शिव-पार्वती उनसे मिलने यहाँ आए। यहाँ देवी भ्रमरांबा का शक्तिपीठ भी है।
- महाकालेश्वर: उज्जैन में शिव ने दूषण नामक असुर का वध कर भक्तों की रक्षा की। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है और यहाँ की भस्म आरती प्रसिद्ध है। पास ही काल भैरव का प्रसिद्ध मंदिर है।
- ओंकारेश्वर: नर्मदा के बीच ॐ आकार के द्वीप पर स्थित। विंध्य पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव यहाँ प्रकट हुए। सामने के तट पर ममलेश्वर (अमलेश्वर) मंदिर है, और स्तोत्र में “ओंकारममलेश्वरम्” दोनों का एक साथ उल्लेख है।
- केदारनाथ: महाभारत युद्ध के बाद पांडव पाप-मुक्ति के लिए शिव को खोजते आए। शिव बैल रूप में छिपे; भीम ने पहचान लिया तो वे धरती में समाने लगे, और उनका पृष्ठ भाग यहाँ रह गया। यह चार धाम यात्रा का भी हिस्सा है और सर्दियों में बंद रहता है।
- भीमाशंकर: कुंभकर्ण के पुत्र भीम नामक असुर का वध करके शिव यहाँ स्थापित हुए। यहीं से भीमा नदी निकलती है।
- काशी विश्वनाथ: शिव की अपनी नगरी काशी, जिसे प्रलय में भी नष्ट न होने वाला माना गया है। मान्यता है कि काशी में देह त्यागने वाले को शिव तारक मंत्र देते हैं।
- त्र्यंबकेश्वर: ऋषि गौतम की तपस्या से गंगा यहाँ गोदावरी के रूप में आईं। यहाँ के लिंग में तीन छोटे लिंग हैं — ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक।
- वैद्यनाथ: रावण शिवलिंग को लंका ले जा रहा था; शर्त थी कि लिंग धरती पर न रखा जाए। देवताओं की युक्ति से लिंग यहीं धरती पर रख दिया गया और फिर हिला नहीं। सावन में यहाँ की काँवड़ यात्रा प्रसिद्ध है।
- नागेश्वर: दारुका नामक राक्षसी और उसके साथियों से शिव-भक्त सुप्रिय की रक्षा के लिए शिव यहाँ प्रकट हुए। स्तोत्र में इसे “दारुकावन” में बताया गया है।
- रामेश्वरम: लंका पर चढ़ाई से पहले (एक अन्य परंपरा में रावण-वध के बाद) श्रीराम ने यहाँ शिवलिंग स्थापित करके पूजा की। यह चार धामों में दक्षिण का धाम भी है।
- घृष्णेश्वर: शिव-भक्त घुश्मा के पुत्र को ईर्ष्यालु बहन ने मार डाला; घुश्मा की अटूट भक्ति से शिव ने पुत्र को जीवित किया और यहाँ बस गए। यह एलोरा की गुफाओं के पास है।
विवादित स्थान: वैद्यनाथ को देवघर (झारखंड) के साथ परली (महाराष्ट्र) भी अपना मानता है; नागेश्वर के लिए द्वारका (गुजरात), औंढा नागनाथ (महाराष्ट्र) और जागेश्वर (उत्तराखंड) तीनों का दावा है; और भीमाशंकर के लिए पुणे के पास के मंदिर के साथ असम का एक स्थान भी परंपरा में आता है। यहाँ दी गई सूची सबसे व्यापक रूप से मानी जाने वाली है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥ एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
अर्थ: सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकाल, ओंकार में अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी में भीमाशंकर, सेतुबंध में रामेश्वर, दारुकावन में नागेश, वाराणसी में विश्वेश्वर, गौतमी (गोदावरी) के तट पर त्र्यंबक, हिमालय पर केदार और शिवालय में घुश्मेश्वर। जो मनुष्य सुबह-शाम इन ज्योतिर्लिंगों का पाठ करता है, उसके सात जन्मों के पाप इनके स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं।
ध्यान दें कि स्तोत्र में वैद्यनाथ को “परल्यां” (परली में) कहा गया है — परली के दावे का यही मुख्य आधार है, जबकि देवघर की परंपरा भी उतनी ही पुरानी और व्यापक है।
दर्शन की योजना
- ज्योतिर्लिंग पूरे भारत में फैले हैं; अधिकतर भक्त एक बार में एक क्षेत्र के मंदिर जोड़ते हैं — जैसे उज्जैन-ओंकारेश्वर, या महाराष्ट्र के तीन ज्योतिर्लिंग, या सोमनाथ-नागेश्वर।
- केदारनाथ केवल गर्मियों के कुछ महीनों में खुलता है और वहाँ के लिए पंजीकरण ज़रूरी है।
- महाकालेश्वर की भस्म आरती जैसी विशेष पूजाओं के लिए पहले से बुकिंग करनी होती है।
- दर्शन का समय, विशेष पूजा के नियम और शुल्क हर मंदिर के अलग हैं और बदलते रहते हैं — यात्रा से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।
पर्व और व्रत
महाशिवरात्रि पर सभी ज्योतिर्लिंगों में रात भर पूजा होती है। सावन मास में, विशेषकर सोमवार को, सबसे अधिक भक्त आते हैं — सोमवार व्रत कथा और प्रदोष व्रत कथा पढ़ें। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं और इस दिन भी शिव-पूजा का विशेष महत्व है।
मंत्र
ज्योतिर्लिंग दर्शन और घर की शिव-पूजा के लिए सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र है:
ॐ नमः शिवाय
इसका अर्थ और जप-विधि ॐ नमः शिवाय पृष्ठ पर, और रक्षा व आरोग्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र देखें।
अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए The 12 Jyotirlingas of Shiva (English) देखें। देवी के तीर्थों के लिए शक्तिपीठ और अन्य तीर्थों के लिए तीर्थ अनुभाग देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
12 ज्योतिर्लिंग कौन-कौन से हैं?
सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर — यही बारह ज्योतिर्लिंग हैं, जिनका क्रम द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र से लिया जाता है।
ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग में क्या अंतर है?
शिवलिंग शिव का प्रतीक है, जिसे कहीं भी स्थापित कर पूजा जा सकता है। ज्योतिर्लिंग वे विशेष स्थान हैं जहाँ परंपरा के अनुसार शिव स्वयं प्रकाश-स्तंभ (ज्योति) के रूप में प्रकट हुए; इन्हें स्वयंभू माना जाता है।
पहला ज्योतिर्लिंग कौन-सा है?
स्तोत्र के क्रम में पहला ज्योतिर्लिंग गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ है। कथा है कि चंद्रमा (सोम) ने यहाँ शिव की आराधना करके दक्ष के श्राप से मुक्ति पाई थी।
किस राज्य में सबसे अधिक ज्योतिर्लिंग हैं?
महाराष्ट्र में सबसे अधिक तीन ज्योतिर्लिंग हैं — भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर। एक परंपरा परली वैद्यनाथ और औंढा नागनाथ को भी ज्योतिर्लिंग मानती है, जिससे यह संख्या पाँच हो जाती है। गुजरात और मध्य प्रदेश में दो-दो हैं।
किन ज्योतिर्लिंगों के स्थान पर विवाद है?
वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड या परली, महाराष्ट्र), नागेश्वर (द्वारका, गुजरात या औंढा, महाराष्ट्र या जागेश्वर, उत्तराखंड) और भीमाशंकर (पुणे के पास या असम) — इन तीनों के लिए एक से अधिक स्थान दावा करते हैं। यहाँ दी गई सूची सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार है।
12 ज्योतिर्लिंग स्तोत्र पढ़ने का क्या फल है?
स्तोत्र की अंतिम पंक्ति कहती है कि जो मनुष्य सुबह-शाम इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं। भक्त इसे रोज़ की शिव-पूजा में और सावन में विशेष रूप से पढ़ते हैं।