व्रत कथा · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी · दिसंबर 2026

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा 2026: एकादशी देवी के जन्म की कथा और पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो 2026 में दिसंबर के पहले सप्ताह में पड़ेगी — सटीक तारीख और पारण का समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी प्रकट हुई थीं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया था। इसलिए जो लोग एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे प्रायः उत्पन्ना एकादशी से ही आरंभ करते हैं।

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा: एक नज़र में

तिथिमार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमांत पंचांग); गुजरात-महाराष्ट्र के अमांत पंचांग में कार्तिक कृष्ण एकादशी
2026 मेंदिसंबर 2026 का पहला सप्ताह — सटीक तारीख स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें
देवताभगवान विष्णु और एकादशी देवी
पारणअगले दिन द्वादशी में, हरि वासर के बाद — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें
विशेष महत्वएकादशी देवी का प्राकट्य दिवस; नया एकादशी व्रत शुरू करने के लिए श्रेष्ठ
अगली एकादशीमोक्षदा एकादशी, रविवार 20 दिसंबर 2026

व्रत की तिथि, प्रदोष काल और पूजा का समय शहर और परंपरा के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

साल भर की चौबीस एकादशियों में उत्पन्ना एकादशी का विशेष स्थान है, क्योंकि यह स्वयं एकादशी देवी के प्रकट होने का दिन है। कार्तिक की देव उठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) के बाद आने वाली यह पहली एकादशी है।

उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि

  1. दशमी: दशमी की शाम सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें और रात में अन्न न लें।
  2. संकल्प: एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। यदि आप इसी दिन से वर्ष भर के एकादशी व्रत शुरू कर रहे हैं, तो वह संकल्प भी लें।
  3. पूजन: विष्णु जी को पंचामृत स्नान, पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, धूप-दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। एकादशी देवी का भी ध्यान करें।
  4. कथा: नीचे दी गई उत्पन्ना एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।
  5. जप और आरती: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें और ॐ जय जगदीश हरे आरती गाएँ।
  6. जागरण और दान: रात्रि में भजन-कीर्तन करें। अगले दिन ज़रूरतमंद को भोजन और गर्म वस्त्र दान करें (यह सर्दियों की शुरुआत का समय है)।
  7. पारण: द्वादशी को पंचांग में दिए पारण समय में व्रत खोलें।

पूजा सामग्री

विष्णु जी का चित्र या शालिग्राम, पंचामृत, गंगाजल, पीला कपड़ा, पीले फूल, तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़े हुए), पीला चंदन, अक्षत, धूप, घी का दीपक, मौसमी फल और मिठाई।

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

सतयुग में मुर नाम का एक अत्यंत बलवान और क्रूर दैत्य था। उसने इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित करके स्वर्ग से निकाल दिया। दुखी देवता पहले भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने कहा कि इस संकट से केवल भगवान विष्णु ही मुक्ति दिला सकते हैं।

देवता क्षीरसागर पहुँचे और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान देवताओं के साथ मुर की नगरी चंद्रावती पहुँचे और युद्ध शुरू हुआ। भगवान ने असंख्य दैत्यों का संहार कर दिया, पर मुर से युद्ध बहुत लंबा चला। कहते हैं कि यह युद्ध हज़ारों वर्षों तक चलता रहा।

युद्ध से थककर भगवान विश्राम के लिए बदरिकाश्रम की हेमवती नाम की एक गुफा में चले गए और वहाँ योगनिद्रा में लेट गए। मुर दैत्य उनका पीछा करते हुए गुफा तक पहुँच गया। उसने भगवान को सोया देखा और सोचा कि यही अवसर है, और उन पर प्रहार करने के लिए आगे बढ़ा।

उसी क्षण भगवान के शरीर से एक अत्यंत तेजस्वी और सुंदर कन्या प्रकट हुई, जिसके हाथों में दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। उसने मुर को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ और अंत में उस कन्या ने मुर का सिर काटकर उसका वध कर दिया।

जब भगवान की नींद खुली तो उन्होंने मुर को मरा हुआ और कन्या को हाथ जोड़े खड़ा पाया। कन्या ने बताया कि वह उन्हीं के शरीर से उत्पन्न हुई है और उसने उनकी रक्षा के लिए दैत्य को मारा है। प्रसन्न होकर भगवान ने कहा, “तुम्हारा जन्म एकादशी तिथि को हुआ है, इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। वर माँगो।”

एकादशी देवी ने कहा, “प्रभु, जो भी मनुष्य इस तिथि को श्रद्धा से व्रत रखे, उसके सारे पाप नष्ट हों और उसे आपका लोक प्राप्त हो।” भगवान ने यह वरदान दे दिया और कहा कि सभी तिथियों में एकादशी उन्हें सबसे प्रिय रहेगी। तभी से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई और इस दिन को उत्पन्ना एकादशी कहा जाने लगा।

व्रत के नियम

  • एकादशी को चावल, गेहूँ, दालें और सामान्य नमक न खाएँ।
  • तुलसी के पत्ते न तोड़ें; पूजा के लिए एक दिन पहले तोड़ लें।
  • दिन में सोने, क्रोध और निंदा से बचें; भगवान का नाम लेते रहें।
  • द्वादशी को हरि वासर समाप्त होने के बाद और द्वादशी तिथि रहते पारण करें।
  • बीमार, बुज़ुर्ग और गर्भवती महिलाएँ फलाहार व्रत रखें।

एकादशी व्रत की सामान्य विधि और सभी 24 एकादशियों के नाम एकादशी व्रत कथा पृष्ठ पर हैं। इसके बाद आने वाली मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 को है। अंग्रेज़ी में What is Ekadashi पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्पन्ना एकादशी 2026 में कब है?

उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो 2026 में दिसंबर के पहले सप्ताह में आएगी। एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी, यह शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए व्रत और पारण की सटीक तारीख अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

उत्पन्ना एकादशी को यह नाम क्यों मिला?

'उत्पन्ना' का अर्थ है उत्पन्न होना। पद्म पुराण की कथा के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या उत्पन्न हुई, जिसने मुर दैत्य का वध किया। भगवान ने उसका नाम एकादशी रखा।

क्या एकादशी व्रत उत्पन्ना एकादशी से शुरू करना चाहिए?

हाँ, परंपरा में यही सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह एकादशी देवी का जन्म दिवस है। जो लोग पूरे वर्ष की 24 एकादशी का व्रत लेना चाहते हैं, वे इसी दिन संकल्प लेते हैं।

उत्पन्ना एकादशी के व्रत में क्या खाएँ?

फल, दूध, मेवे, साबूदाना, आलू, शकरकंद और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की चीज़ें सेंधा नमक के साथ ले सकते हैं। चावल, गेहूँ और दालें वर्जित हैं।

उत्पन्ना एकादशी का फल क्या बताया गया है?

मान्यता है कि इस व्रत से पूर्व जन्मों और इस जन्म के पाप नष्ट होते हैं और तीर्थ-स्नान व दान के समान पुण्य मिलता है। एकादशी देवी को वरदान मिला था कि जो इस तिथि को व्रत करेगा, उसके पाप भगवान स्वयं नष्ट करेंगे।

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