व्रत कथा · रविवार, 20 दिसंबर 2026
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा 2026: तिथि, गीता जयंती और पूजा विधि
अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
मोक्षदा एकादशी 2026 रविवार, 20 दिसंबर को है। यह मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है और इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इसी तिथि को श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इस व्रत को पितरों को मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। पारण अगले दिन, 21 दिसंबर को द्वादशी में किया जाएगा — समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा: एक नज़र में
| मोक्षदा एकादशी | रविवार, 20 दिसंबर 2026 |
|---|---|
| तिथि | मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी |
| गीता जयंती | रविवार, 20 दिसंबर 2026 |
| पारण | सोमवार, 21 दिसंबर 2026 (द्वादशी) — समय स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें |
| दत्तात्रेय जयंती | बुधवार, 23 दिसंबर 2026 |
व्रत की तिथि, प्रदोष काल और पूजा का समय शहर और परंपरा के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मार्गशीर्ष मास को श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं अपना रूप बताया है — “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” (गीता 10.35)। इसी पवित्र महीने की शुक्ल एकादशी मोक्षदा एकादशी है, जो पितरों की मुक्ति और गीता के ज्ञान, दोनों से जुड़ी है। 2026 में यह रविवार, 20 दिसंबर को है।
मोक्षदा एकादशी पूजा विधि
- दशमी (19 दिसंबर): शाम को सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें; रात में अन्न न लें।
- संकल्प: 20 दिसंबर की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के सामने व्रत का संकल्प लें। यदि व्रत का पुण्य पितरों को देना हो, तो संकल्प में उनका नाम लें।
- पूजन: भगवान को पंचामृत स्नान, पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, धूप-दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। चौकी पर भगवद्गीता की पुस्तक रखकर उसकी भी पूजा करें।
- कथा और गीता पाठ: मोक्षदा एकादशी की कथा पढ़ें और गीता का पाठ करें — पूरा न हो सके तो एक अध्याय ही सही। श्लोक हिंदी अर्थ सहित भगवद्गीता हिंदी में पढ़ें।
- आरती: ॐ जय जगदीश हरे आरती करें।
- जागरण: रात में भजन-कीर्तन करें।
- पारण (21 दिसंबर): द्वादशी को पंचांग के अनुसार पारण समय में, किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराकर व्रत खोलें।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में गोकुल (चंपक) नाम के नगर में वैखानस नाम के एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। प्रजा उन्हें पिता की तरह मानती थी और राज्य में सुख-शांति थी। वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण भी उनके राज्य में रहते थे।
एक रात राजा ने स्वप्न देखा कि उनके स्वर्गीय पिता नरक में घोर यातनाएँ भोग रहे हैं और रो-रोकर उनसे कह रहे हैं, “पुत्र, मुझे इस नरक से निकालो।” राजा की नींद खुल गई और उनका मन बेचैन हो उठा। सुबह उन्होंने विद्वान ब्राह्मणों को बुलाकर अपना स्वप्न सुनाया और कहा, “जिस पुत्र के रहते पिता नरक में कष्ट पाए, उसका राजपाट और सुख किस काम का? कोई उपाय बताइए जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिले।”
ब्राह्मणों ने कहा कि पास ही पर्वत नाम के एक त्रिकालदर्शी मुनि का आश्रम है, वे इसका उपाय बता सकेंगे। राजा मुनि के आश्रम पहुँचे और प्रणाम करके अपनी व्यथा सुनाई। मुनि ने आँखें बंद करके ध्यान लगाया और फिर बोले, “राजन, तुम्हारे पिता ने अपने पिछले जन्म में एक भूल की थी। उन्होंने अपनी एक पत्नी के ऋतुकाल में उसकी इच्छा का निरादर किया और दूसरी पत्नी के मोह में धर्म का पालन नहीं किया। उसी कर्म के कारण वे नरक में हैं।”
राजा ने हाथ जोड़कर उपाय पूछा। मुनि ने कहा, “मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा कहते हैं, का व्रत विधिपूर्वक करो और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दो। इससे उन्हें अवश्य मुक्ति मिलेगी।”
राजा लौट आए और मोक्षदा एकादशी आने पर अपने पूरे परिवार के साथ श्रद्धा से व्रत किया, रात्रि जागरण किया और द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दिया। अंत में उन्होंने संकल्प करके व्रत का सारा पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया।
उसी क्षण आकाश से फूलों की वर्षा हुई और राजा ने अपने पिता को दिव्य रूप में स्वर्ग की ओर जाते देखा। पिता ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “पुत्र, तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हारे व्रत के पुण्य से मैं नरक से मुक्त हो गया हूँ।”
तभी से मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने वाले के पितरों को सद्गति मिलती है और व्रती स्वयं भी पापों से मुक्त होकर भगवान के धाम को प्राप्त करता है। इस कथा को पढ़ने या सुनने मात्र से भी पुण्य मिलता है।
गीता जयंती: इस दिन क्या करें
- पूरे परिवार के साथ गीता के कम से कम एक अध्याय का पाठ और उस पर चर्चा करें।
- बच्चों को गीता के कुछ सरल श्लोक, जैसे कर्मण्येवाधिकारस्ते (2.47), अर्थ सहित सिखाएँ।
- मंदिर या ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को गीता की प्रति दान करें।
- अंग्रेज़ी में गीता अध्ययन की सरल योजना के लिए Gita Jayanti 2026 study guide पढ़ें।
व्रत के नियम
- एकादशी को चावल, गेहूँ और दालें न खाएँ; तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
- पितरों के लिए व्रत रख रहे हों तो संकल्प में उनका नाम अवश्य लें।
- द्वादशी को हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते पारण करें।
- बीमार, बुज़ुर्ग और गर्भवती महिलाएँ फलाहार व्रत रखें।
एकादशी व्रत की सामान्य विधि के लिए एकादशी व्रत कथा और इससे पहले आने वाली उत्पन्ना एकादशी पढ़ें। तीन दिन बाद, 23 दिसंबर को दत्तात्रेय जयंती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोक्षदा एकादशी 2026 में कब है?
भारतीय पंचांगों के अनुसार मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है। पारण अगले दिन, सोमवार 21 दिसंबर को द्वादशी तिथि में होगा। एकादशी तिथि का आरंभ-समापन और पारण का समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही दिन क्यों होती हैं?
परंपरा के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती दोनों के रूप में मनाई जाती है।
मोक्षदा एकादशी का क्या महत्व है?
'मोक्षदा' का अर्थ है मोक्ष देने वाली। मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें सद्गति मिलती है, और व्रत करने वाले को भी पापों से मुक्ति मिलती है।
मोक्षदा एकादशी पर गीता का कौन सा अध्याय पढ़ें?
संभव हो तो पूरी गीता का पाठ करें। समय कम हो तो दूसरा अध्याय (सांख्य योग), बारहवाँ अध्याय (भक्ति योग) या अठारहवाँ अध्याय पढ़ना प्रचलित है। हिंदी अर्थ के साथ श्लोक हमारे भगवद्गीता अनुभाग में उपलब्ध हैं।
मोक्षदा एकादशी के व्रत में क्या खाएँ?
फल, दूध, मेवे, साबूदाना, आलू, शकरकंद और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की चीज़ें सेंधा नमक के साथ ली जा सकती हैं। चावल, गेहूँ और दालें नहीं खाई जातीं।